कृ तज्ञता का भाव उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है तथा कृतग्घ्नता उन्नति मे पूर्ण विराम लगाती है ।
डंगरसी रतनू कृत : चित्तौड़ के तृतीय साके का एक समकालीन काव्य ग्रन्थ
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लेखक : ठाकुर सौभाग्य सिंह जी शेखावत
साका और जौहर के लिए विश्व के वीरसमाज में वंदनीय चित्तौड़ भारतीय समाज का
पवित्र तीर्थ रहा है । चित्तौड़ ने जहां अनेक...

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