कृ तज्ञता का भाव उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है तथा कृतग्घ्नता उन्नति मे पूर्ण विराम लगाती है ।
सिर कटने के बाद भी लड़े थे कुंवर सुखसिंह मेड़तिया, आज भी पूजते है लोग
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आप जो ये चित्र देख रहे हैं वो रियासती काल में अपने देश, धर्म और संस्कृति के
लिए प्राणों का बलिदान देने वाले एक योद्धा का स्मारक है | आज इस महान योद्धा
को...

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