एक हादसा सड़क का सुर्ख़ियों में छा गया
हजारों हादसे दिल के; किसी को खबर नहीं|
एक फूल टूटा चमन का; तो माली बिगड़ गया
दिल का गुलिस्तों बिखरा; किसी को खबर नहीं|
किसी ने अपने प्यार को गजल बना दिया
हर अहसास इक गजल; किसी को खबर नहीं|
सौदागरों ने मिलकर एक नया खुदा बना दिया
असली खुदा कहाँ; किसी को खबर नहीं|
जलजले में घिर गिरा तो सब को दिख गया
अरमानों का शहर ढह गय; तो किसी खबर नहीं|
इक मौत हुई ऐसी चर्चा जहां में है
हर पल हुआ था मरना; किसी को खबर नहीं ||
हुकम सिंह राणा

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