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किसी को खबर नहीं

Saturday, January 10, 20150 comments

एक हादसा सड़क का सुर्ख़ियों में छा गया 
हजारों हादसे दिल के; किसी को खबर नहीं|

एक फूल टूटा चमन का; तो माली बिगड़ गया 
दिल का गुलिस्तों बिखरा; किसी को खबर नहीं|

किसी ने अपने प्यार को गजल बना दिया 
हर अहसास इक गजल; किसी को खबर नहीं|

सौदागरों ने मिलकर एक नया खुदा बना दिया 
असली खुदा कहाँ; किसी को खबर नहीं|

जलजले में घिर गिरा तो सब को दिख गया 
अरमानों का शहर ढह गय; तो किसी खबर नहीं|

इक मौत हुई ऐसी चर्चा जहां में है 
हर पल हुआ था मरना; किसी को खबर नहीं ||  


हुकम सिंह राणा
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