चाहतें और मिलन की दूरी
कसक कहानी कह ही गई
पूरी हुई तो बहुत हसरत
पर कुछ तो अधूरी रह ही गई !
इच्छाओं पर हालात है हावी
हकीकत समझ में आ ही गई
उड़ानों की कच्ची दीवारें
बारिश में बस ढह ही गई !
मांझी ने कोशिश की तो बहुत
पर नाव बेचारी बह ही गई
वक्त के सख्त थपेड़ों को
जाने अनजाने सह ही गई
सोचा था खामोश रहेंगे हम
पर कविता, कहानी कह ही गई !
हुकम सिंह राणा

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सच्चाई के सामने सब को घुटने टेकने होते हैं .... हकीकत को लिखा है ...
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