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शब्द - बाण

Tuesday, January 6, 20150 comments


शब्द - बाण है बड़ा नुकीला 
कभी व्यर्थ नहीं जाता है 
लुक्का- छिपी का खेल दिखाकर 
तुरंत प्रकट हो जाता है|

फिर रचता महाभारत ऐसा 
अक्षौणी दल खप जाता है 

भा जाए मन को गर 
काग हंस बन जाता है 

कायर को वीर बनाता है 
तोते को "व्यास"बनाता है 
अगर जीव के चित्त में बैठे 
मुक्ति यही दिलाता है|


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