आदर्शों का पहन लबादा
नृशंसता हमने देखी
सभ्यता ढोने वालों में
गहरी पशुता हमने देखी|
विद्वता शब्दों के बोझे
दबती कुढती हमने देखी
महत्वाकांक्षा नाच नचाती
नेताओं को हमने देखी|
भगवत पूजा में भक्तों में
लहराती कुंठाएं देखी
सिद्धांतोंमें अपवादों की
सतत श्रृंखला हमने देखी|
कैसा धोखा जीवन है यह
मरना जिसकी मंजिल है
कितना भ्रामक है मिलन भी
वियोग जिसकी परिणिति है|
क्षण के मोह ने कैसा जकड़ा
कैसे छुड़ाएं? किसे बुलायें
जीते जी हम रोज मरें
या मर कर जीवन फिर पा जायें|
शून्यावेषण प्रयास सभी
अर्थों में निरर्थकता देखी
स्वयं को कभी नदेख पाये|
नृशंसता हमने देखी
सभ्यता ढोने वालों में
गहरी पशुता हमने देखी|
विद्वता शब्दों के बोझे
दबती कुढती हमने देखी
महत्वाकांक्षा नाच नचाती
नेताओं को हमने देखी|
भगवत पूजा में भक्तों में
लहराती कुंठाएं देखी
सिद्धांतोंमें अपवादों की
सतत श्रृंखला हमने देखी|
कैसा धोखा जीवन है यह
मरना जिसकी मंजिल है
कितना भ्रामक है मिलन भी
वियोग जिसकी परिणिति है|
क्षण के मोह ने कैसा जकड़ा
कैसे छुड़ाएं? किसे बुलायें
जीते जी हम रोज मरें
या मर कर जीवन फिर पा जायें|
शून्यावेषण प्रयास सभी
अर्थों में निरर्थकता देखी
स्वयं को कभी नदेख पाये|

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