कोई न किसी काहुआ यहाँ
क्यों आस लगाये बैठे हो?
कोई न पिलाता नीर यहाँ
क्यों प्यास लगाये बैठे हो |
तमाशबीन संसार को क्यों
मल्लाह बनाये बैठे हो
रिश्ते नाते जिनको कहते
ढोंग है स्वार्थपरता का
इज्जत जिसको समझ रहे हो
नाटक है सुन्दर खलता का
दोस्ती यहाँ दस्ताना है |
सर्दी से बच जाने को
हमदर्दी एक बहाना है
दिल का दर्द छुपाने को|

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