सूरज के आने की आहट पा
रात चली ही जाती है
सब कुछ हर दम नहीं रहता
दुःख की घड़ियाँ भी जाती है
न हो मायूस ऐ मेरे दिल तेरी भी बारी आयेगी
आज ये दुनियां कुछ भी कहे
कल तो यह भी शीश झुकाएगी
उपेक्षा कितनी भी आज करे
कल तेरे गीत सुनाएगी
आज मुबारिक न दे तुझको
कल "पुण्यतिथि" मनाएगी !!

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