हर आँख की तमन्नाहै कोई अपना-सा लगे
हर दिल की ख्वाहिश है कोई अपना तो कहे|
घर भी है साजो-सामानभी है|
ढूंढ रहा हूँ वो शै जिससे घर; घर सा लगे|
हर कोई मिल रहा है मकसद से यहाँ
ढूंढ रहा हूँ वो शख्स, जो केवल यूँ ही मिले
झूठी मुस्कराहट तो दिखती है यहाँ
काश! कभी दिल से निकली हंसी भी दिखे
हर शख्स सहमा सा यहाँ
काश ! बेख़ौफ़ होने की फिजा तो मिले
तकल्लुफों से दब गया है इंसान यहाँ
काश ! बेतकल्लुफी का माहौल तो मिले
तरस गएहै दिल की बात कहने को यहाँ
काश ! कोई अच्छा-सा दिलबर तो मिले !!
हुकम सिंह राणा

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